नवजात की देखभाल के लिए हाईजीन संबंधी बातें

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infant baby hygiene
image credits: Dr. Nikhil's Microdentistry

आप अपने शिशु की देखभाल में कोई कसर नहीं छोड़ना चाहते; आप उसके आहार का पूरा ध्यान रखते हैं, कपड़ों को पूरी तरह साफ़ रखने की कोशिश करते हैं तथा सभी के सुझावों का पूरी तल्लीनता से पालन करते हैं। पर फिर भी मन में संदेह बना रहता है की कहीं साफ़-सफाई में कोई कमी तो नहीं छुट रही। (baby, infant hygiene tips, essentials in hindi)

 

अगर आपके मन में भी बच्चे के आस-पास सफाई रखने से जुड़े संदेह हैं, तो इन बेहद उपयोगी हाइजीन टिप्स का ज़रूर पालन करें-

 

अपने हाथ धोएं-

अपने बच्चे को उठाने से पहले बहुत ज़रूरी है की आप अपने हाथों को किसी अच्छे एंटी-बैक्टीरियल साबुन से साफ़ करें। ये नियम और भी ज़रूरी हो जाता है जब आप कहीं बाहर से आ रहे हों या घर में कोई बीमार हो। अगर आप बिना हाथ धोए शिशु को छुते हैं तो उसे हानिकारक कीटाणुओं के सम्पर्क में ला रहे हैं जो उसे कई तरह से बीमार कर सकते हैं। बच्चे के शुरुआती दिनों में उसका बीमार पड़ना उसके विकास पर भी असर डालता है।

 

बच्चे को नहलाएं-

अपने बच्चे को संक्रमण से बचाने के लिए उसे अच्छे से नहलाने का प्रयास करें। इस तरह वह साफ़-सुथरा भी रहेगा। उसके चेहरे, हाथ व् डायपर के अंदर के हिस्से को अच्छी तरह साफ़ करें। नवजात की नाभि का हिस्सा पूरी तरह ठीक होने तक उसे गीले कपड़े से पोछना बेहतर विकल्प होगा।

 

शिशु के नाख़ून काटें 

गंदे नाखूनों में कई तरह की गंदगी हो सकती है। अपनी उँगलियाँ मुँह में डालने पर शिशु के शरीर में इस गंदगी का प्रवेश होता है और यह कई बीमारियों का कारण बन जाती है। हमेशा उसके नाखूनों को साफ़ और छोटा रखने की कोशिश करें। शिशु के नाख़ून काटने का सबसे अच्छा समय तब है जब वो सो रहा हो। ध्यान रखें, उपयुक्त नेल कटर से ही नाख़ून काटें ताकि उसे कोई तकलीफ न हो।

 

उसके कान साफ़ करें 

बच्चे के नाज़ुक कानों को बहुत सौम्यता से साफ़ करें। उसके कान के अंदर रुई या ऐसी कोई चीज़ कभी न डालें। अगर कान साफ़ करते समय शिशु असहज हो रहा है तो हो सकता है उसके कान में संक्रमण हो। ऐसी संभावना लगने पर चिकित्सक से ज़रूर चर्चा करें।

 

बच्चे की नाक साफ़ रखें 

बच्चे की नाक में जमी सूखी गंदगी को सावधानी से साफ़ करें। इसके लिए आप एक सूती कपड़े को गीला कर उपयोग कर सकते हैं।

 

उसकी आँखें साफ़ करें 

इसी तरह बच्चे की आँखें भी साफ़ रखी जानी चाहिए ताकि किसी भी तरह के संक्रमण से बचा जा सके। रोज़ सुबह उसके आँखों के आस-पास जमे कचरे को साफ़ करें। अगर गंदगी सूख चुकी है तो सूती कपड़े को गीला कर गंदगी साफ़ करें। ध्यान रखें, कपड़ा सौम्य हो तथा आपके हाथों का दबाव भी बहुत कम हो।

 

बच्चे के डायपर नियम से बदलें 

जब बात बच्चे से जुडी स्वच्छता की आती है तो डायपर बहुत ही अहम हो जाते हैं। भारत में डायपर से ज्यादा सूती कपड़े का उपयोग प्रचलन में हैं। आप चाहे जो भी उपयोग करें, नियमित रूप से इन्हें बदला जाना बहुत ही ज़रूरी है। रात में सोने से पहले एक बार डायपर ज़रूर बदलें। शिशु को साफ़ कपड़े से पोछकर ही दूसरा डायपर पहनाएं।

 

बच्चे के खिलौने भी साफ़ रखें 

अक्सर बच्चे खेलते-खेलते खिलौने को मुँह में डाल लेते हैं। ज़ाहिर है, उनके खिलौनों को भी बहुत साफ़ रखना ज़रूरी है। इसलिए उसके खिलौनों को समझदारी से चुनें, नियमित रूप से धोएं व् इनकी सफाई पूरी तरह सुनिश्चित करें।

 

अपना घर साफ़ करें 

बच्चे का कीटाणुओं से सम्पर्क कम करने के लिए आपका घर साफ़ होना ज़रूरी है। घर के फर्श को डिसइन्फेक्टेंट से साफ़ करें। उन इलाकों पर ध्यान दें जहाँ बच्चा अक्सर रहता रहता। इसके अलावा उसके दूध की बोतल आदि चीज़ें भी गर्म पानी में स्टेरिलाइज ज़रूर करें। किचन और बाथरूम भी पूरी तरह साफ़ रखने का प्रयत्न करें।

 

इन आसान नुस्खों को अपनाकर आप निश्चिंत होकर अपने बच्चे के शुरुआती दिनों का आनंद ले सकते हैं।