क्यों जरूरी है वर्षा ऋतु में शरीर की मालिश करना

1279
body-massage-sharir-ki-malish
image credits: Mukda Thai Spa

भारत में मॉनसून चिचिलाती गर्मी से निजात दिलाकर ताज़गी से भर देता है। इस मौसम के आते ही हम एक नई ऊर्जा और निश्चिंतता महसूस करने लगते हैं। पौराणिक ग्रंथों के अनुसार भी यह मौसम किसी भी तरह की जीर्णोद्धार(शरीर में नई ऊर्जा भरने वाली) क्रिया के लिए सर्वश्रेष्ठ है।

Benefits of body massage / maalish

आयुर्वेद के अनुसार मॉनसून में शरीर कमज़ोर हो जाता है। इस दौरान शरीर पर कई तरह की बीमारियां आक्रमण कर सकती है और हमारे कार्य-कौशल को प्रभावित करती हैं। इसलिए इस समय मालिश के माध्यम से शरीर को आराम तथा नई ऊर्जा देना ज़रूरी है।

करें वीर आसन योग और घर बैठे लें आनंद फुट मसाज का

मॉनसून में मालिश के क्या फायदे हैं?

बारिश के मौसम में बाहर का तापमान ठंडा होता है तथा हवा धूलरहित हो जाती है। ऐसे में रोमछिद्रों को तेलों के मालिश के ज़रिये खोलने से शरीर को अत्यंत लाभ होता है। इस समय शरीर तेल भी पूरी तरह सोख पाता है। साथ ही कुछ लोगों में शरीर के हिस्सों में पानी जमा होने लगता है। मालिश शरीर में रक्तप्रवाह बढ़कर अतिरिक्त पानी को बाहर निकालती है। साथ ही मालिश करने से रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ती है, मांसपेशियों में तनाव घटता है और अवसाद कम होता है।

आयुर्वेद के विषेशज्ञों के अनुसार नियमित रूप से मालिश करने से उम्र लम्बी होती है, यौवन लौटता है और शरीर के मन भी पुनर्जीवित होता है।

रक्त संबंधी विकारों को दूर करने के लिए ईलाज – कप्पिंग थेरेपी

अभ्यंग: स्वयं से स्वयं का उपचार-

आयुर्वेद में अभ्यंग को बहुत मान्यता दी गयी है। यह क्रिया स्वयं से स्वयं की मालिश करने की है जिसमे तेल गर्म कर आप स्वयं अपने शरीर के हर अंग की मालिश करते हैं। यह मॉनसून में हफ्ते 2-7 बार की जानी चाहिए। चिकित्सा ग्रंथों में अपनी नियमित क्रियाओं में शामिल करने पर ज़ोर दिया गया है। इस क्रिया के ज़रिये आप किसी और पर निर्भर हुए बिना नियम से अपनी मालिश कर सकते हैं। यह पंचकर्म की तैयारी के लिए भी की जाती है।

अभ्यंग एकाग्रता और आत्मविश्वास बढ़ाता है। यह आँखों को आराम देकर गहरी नींद देता है तथा शरीर को सुगठित बनाता है। आलस तथा दर्द कम करने के लिए यह सबसे प्रभावकारी तरीका है।

शरीर की मालिश के लिए कैसे चुनें तेल, ताकि मिल सके मालिश का पूरा फायदा

शिरोधारा-

इस क्रिया में जड़ी बूटियों से शोधित तेल, दूध या छांछ का प्रयोग किया जाता है। इसमें आपको पीठ के बल लेटाकर माथे पर शोधित द्रव्य की धार 45 मिनट तक डाली जाती है। इससे मस्तिष्क में रक्त प्रवाह बढ़ता है तथा अतिरिक्त गर्मी निकलती है। यह क्रिया अनिद्रा, तनाव, आलस और ऊर्जाहीनता में अत्यंत प्रभावी ढंग से काम करती है।

गर्मियों में शरीर की मालिश करती है तनाव, सूजन व चिंता से मुक्त

सिर की मालिश-

शरीर के साथ सिर की मालिश ज़रूर करें। यह मॉनसून में बालों से जुडी समस्याओं से निपटने में मदद करेगा। बाल झड़ेंगे नहीं, टूटेंगे नहीं तथा इन्हे संभालना आसान हो जाएगा। रुसी से परेशान हैं तो दही से मालिश करें या तेल में नीबू के रस की कुछ बुँदे मिला लें, फायदा मिलेगा।

साथ ही अगर बालों में कांतिहीनता है तो तेल से मालिश करें। अरंडी तथा नारियल के तेल को बराबर मात्रा में मिलाएं तथा उँगलियों के छोड़ से हल्के दबाव के साथ मालिश करें। आधे घंटे या पूरी रात यूँही छोड़ दें तथा अगले दिन बाल धो लें। आपके बाल रेशमी  और चमकदार नज़र आएँगे।

पदाभ्यांग: अपने पैरों की मालिश का तरीका

पैरों की मालिश-

रोज़ मालिश न भी कर पाएं तो पैरों में तेल ज़रूर लगाएं। माना जाता है की अच्छे स्वास्थ्य के लिए ठंडे दिमाग और गर्म पैरों की ज़रूरत होती है। इसलिए पैरों की देखभाल बहुत ज़रूरी है।

मॉनसून में पैरों को गीला न छोड़ें; इनमे संक्रमण हो सकता है। इन्हे साफ़ पानी से धोकर पोछें। फिर अच्छी क्रीम या तेल से मालिश करें। हफ्ते में एक बार पैरों को गुनगुने पानी में नीबू का रस तथा बॉडी वाश मिलाकर 15 मिनट भिगोकर रखें। फिर एक पत्थर की  मदद से मृत कोशिकाएं हटाएँ। फिर पैरों को अच्छी तरह साफ़ कर क्रीम या तेल लगाएं। यह पैरों के साथ पुरे शरीर को आराम देगा और देखते ही देखते आपके दिन भर की सारी चिंता व थकान छूमंतर हो जाएगी।