शरीर के बेहतर संतुलन व हाथोंं की मजबूती के लिए कीजिए भुजपीड़ासन योग

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bhujpidasana yoga
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भुजपीड़ासन एक बेहद दिलचस्प आसन है। इसकी मुद्रा देखकर आपको लग सकता है की इसके अभ्यास के लिए मज़बूत बाजुओं की ज़रूरत होगी पर ऐसा नहीं है। इस आसन के सफल अभ्यास के लिए आपके शरीर में संतुलन होना ज़रूरी है। इसका अभ्यास आपको आत्मविश्वास तो देगा ही, साथ ही मजबूत शरीर और बेहतर तन्त्र भी देगा। (bhujpidasana yoga for strong hands and to improve body balance in hindi)

 

तो आइये, जानते हैं भुजपीड़ासन के अभ्यास की विधि-

 

  1. सीधे खड़े हो जाएँ और अपने पैरों के बीच कंधों जितनी दुरी बना लें। अब घुटने मोड़ें और दंड की अवस्था में बैठ जाएँ।
  2. अपने शरीर के उपरी हिस्से हो सामने की ओर ले जाएं। धड़ को इसी तरह नीचे ले जाते हुए कूल्हों को ऊपर उठाते जाएँ ताकि आपकी जांघें ज़मीन के समानांतर आ जाएँ।
  3. अपनी बाई जांघ के पीछे जितना हो सके अपनी बाई बाजू और कंधा अंदर लेकर जाएँ तथा बाएँ हाथ को बाई एडी की बाहरी ओर ज़मीन पर रखें। आपके हाथ की उँगलियाँ सामने की ओर होंगी।
  4. दाएं हाथ के लिए भी यही प्रक्रिया दोहराएं। ऐसा करने पर आपकी पीठ का उपरी हिस्सा गोलाई का आकार लेगा।
  5. हाथों के अंदरूनी हिस्सों से ज़मीन पर हल्का दबाव बनाएँ और धीरे-धीरे अपने शरीर को झुलाएँ; इस दौरान आपके शरीर का वजन हाथों और पैरों के बीच झूलेगा।
  6. जैसे-जैसे आप हाथ सीधा करेंगे. आपके पैर हवा में उठने लगेंगे। इसके लिए आपको मजबूत हाथों से ज्यादा संतुलित शरीर की ज़रूरत होगी।
  7. बाजुओं को पैरों से लपेटें तथा दाएं पैर के पंजे को बाए पैर के पंजे से अटका लें।
  8. सामने की ओर देखें। इस अवस्था में 30 सेकंड रुकने की कोशिश करें फिर कोहनी मोड़कर वापस ज़मीन पर आ जाएँ।
  9. अब बाएँ पंजे को दाएं पंजे के ऊपर रखकर इस प्रक्रिया को दोहराएँ।

 

आप चाहें तो इस आसान को बेहतर तरीके से करने के लिए कुछ अन्य आसनों का भी अभ्यास कर सकते हैं। मालासन, बकासन, गरुड़ासन आदि इस आसन के अभ्यास में आपकी मदद करेंगे।

 

यह आसन आपको कई तरह के अन्य आसनों के सफल अभ्यास में मदद करेगा। इतना ही नहीं, इसके अभ्यास आप इन लाभों को पा सकते हैं-

  • यह हाथों को मज़बूती प्रदान करता है।
  • कलाइयों को लचीला और मजबूत बनाता है जिससे कई तरह की क्रियाएँ आसान हो जाती हैं।
  • पेट की मांसपेशियों को सुगठित करता है तथा अत्यधिक वसा हटाता है।
  • शरीर में संतुलन बढ़ाता है।
  • इस आसन का अभ्यास करने से आपका आत्मविश्वास बढ़ता है।
  • मन शांत और सूखी बनाता है।