ध्यान में वृद्धि व शांत मन के लिए करें कुम्भक प्राणायाम

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Ujjayi-Pranayama
image credits: योग शिखर - blogger

प्राणायाम के अभ्यास के तीन भाग होते हैं- सांस लेना, सांस छोड़ना तथा सांस को रोके रखना। सांस रोकने की क्रिया की पारंपरिक हठ योग में मुख्य भूमिका है तथा इसे कुम्भक के नाम से जाना जाता है। (breath retention exercises, kumbhak pranayama in hindi) माना जाता है की कुम्भक के सही अभ्यास से ध्यान में वृद्धि होती है, मन शांत होता जाता है, कुंडलनी जागृत होती है, शुशुम्भना नाड़ी पवित्र हो जाती है तथा आपकी जीवनावधि बढ़ जाती है। इसके अलावा प्राणायाम में कुम्भक के और भी कई चमत्कारिक लाभ कहे जाते हैं जिनकी समझ क्रियायोगी को बेहतर रूप से होती है।

 

प्राणायाम और बंध के सम्पूर्ण लाभों को पाने के लिए कुम्भक का ज्ञान और अभ्यास आवश्यक है। आइये जानते हैं कुम्भक के अभ्यास की विधि-

 

  1. सांस लेने के बाद रोकने की क्रिया को अन्तर कुम्भक कहा जाता है। इसके लिए आपको जालंधर और मूल बंध का अभ्यास ज़रूरी होगा।
  2. अब समवृत्ति उज्जयी में स्थापित हो जाएं। इसके लिए अपनी साँसों पर ध्यान लगाएं तथा सांस लेने और छोड़ने की अवधि बराबर करने की कोशिश करें। फिर 6 बार ॐ का उच्चारण करें।
  3. इसके बाद कुम्भक की शुरुआत होगी। इसके लिए गहरी सांस अंदर लेकरजालंधर और मूल बंध लगाएं। सहजता और सौम्यता के साथ इस बंध में बिना सांस छोड़े 2 ॐ की अवधि तक रुके रहें। फिर धीरे से सांस छोड़ें और साथ ही मूल बंध भी खोल दें। अब समवृत्ति में 2-3 साँसें लें फिर अगले कुम्भक की ओर बढ़ें (कभी भी एक के बाद एक कुम्भक न करें; बीच में उज्जयी के द्वारा आराम भी करें। )
  4. अब कुम्भक की अवधि को 2 ॐ से बढ़ाकर अपनी क्षमता तक लेकर जाएं। शुरुआत में आपकी क्षमता 2-3 ॐ की ही होगी तथा इसके बढ़ने में कुछ हफ्ते लग सकते हैं।
  5. अगले चरण में कुम्भको के बीच की उज्जयी गणना को घटाएं और कोशिश करें की कुम्भक में आप आसानी से 2 ॐ की अवधि 5 मिनट तक बढ़ा लें। इसके बाद कुम्भक को 3 ॐ के लिए लगाएं तथा इनके बीच 2-3 उज्जयी लें। अब दुबारा उज्जयी की अवधि घटाने की कोशिश करें तथा 3 ॐ की अवधि 5 मिनट तक बढ़ाएं।
  6. इसी तरह बढ़ते हुए कुम्भक की अवधि 6 ॐ (शुरुआत मेंसमवृत्ति की संख्या) के बराबर कर लें। इस अवस्था में आकर आपको रुकने की सलाह दी जाती है। कुम्भक को इसके आगे समझने के लिए मार्गदर्शन लें।

 

कुम्भक आपके ध्यान को सूक्ष्म करता जाता है जिससे आप अपने शरीर और मन के छोटे से छोटे पहलु को समझ पाते हैं। इस दिशा में एक गुरु का मार्गदर्शन आपकी कोशिश और भी आसान बना सकता है।