प्रसव के बाद ज़रूरी चेकअप रुटीन(पोस्टपार्टम चेकअप )

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image credits: Pinterest

सामान्यतः प्रसव के बाद पहले 42 दिनों को पोस्टपार्टम अवधि कहा जाता है। प्रसव के बाद के 48 घंटे माँ और बच्चे के जीवन के लिए बहुत ही महत्वपूर्ण माने जाते हैं  वहीं इसके बाद पहला एक हफ्ता दोनों की सेहत के नज़रिए से बहुत ही अहम है। ज्यादातर जानलेवा और गंभीर समस्याएं इसी अवधि के दौरान उभरती हैं। (check ups after delivery, birth, during pregnancy) इसलिए प्रसव के बाद सही देखभाल अर्थात पोस्ट पार्टम केयर किसी भी जटिलता की पहचान और निवारण के लिए बहुत ही ज़रूरी है।

 

प्रसव के बाद चिकित्सक कई ऐसे निर्देश देते हैं जिनसे जच्चा-बच्चा की देखभाल में मदद मिलती है। पर ऐसी कई जांचें भी हैं जिन्हें पोस्टपार्टम अवधि में करवाना ज़रूरी होता है। भारत में यह जांच रूटीन कैसा होता है, आइये जानें-

 

पहली जांच: यह प्रसव के तुरंत बाद होगा।

अगर प्रसव किसी स्वास्थ्य संस्थान में नहीं हुआ है तो 24 घंटे के अंदर चिकित्सक से जाकर मिलें।

 

माँ के लिए जांच के मुख्य बिंदु इस प्रकार होंगे-

  • प्रसव की जगह
  • प्रसव करने वाले का नाम
  • किसी तरह की जटिलता या बेहोशी का इतिहास
  • पैरों में दर्द, पेट में दर्द, बुखार, पेशाब की कोई समस्या, स्तनों में सुजन
  • दुग्धपान
  • सामान्य आहार से जुडी बातें
  • कोई और शिकायत

इसके अलावा माँ का रक्तचाप, नाडी, तापमान आदि भी चेक किया जाएगा। पेट और योनी की जांच की जाएगी तथा सुजन, मवाद आदि के उपचार की व्यवस्था की जाएगी। रक्तप्रवाह की जांच तथा स्तनों की जांच भी की जाएगी। साथ ही माँ को बच्चे की देखभाल और दुग्धपान से जुड़े निर्देश भी दिए जाएंगे।

 

शिशु की जांच के मुख्य बिंदु:

  • बच्चे ने पेशाब कब किया था
  • क्या दुग्धपान में कोई समस्या है
  • बुखार
  • नाल में सुजन आदि होना
  • नवजात की हलचल सामान्य है या नहीं
  • त्वचा के संक्रमण के लक्षण
  • बच्चे की साँसों की दर और स्वरुप
  • पीलिया के लक्षण
  • योनी में किसी प्रकार की विकृति

इसी के साथ आपको बच्चे को नहलाने और साफ रखने के लिए निर्देश भी दिए जाएंगे जिससे नाड़ी को कोई नुकसान न पहुंचे।

 

दूसरी जांच: प्रसव के बाद तीसरे दिन तथा तीसरी जाँच : प्रसव के बाद सांतवे दिन

 

माँ की जांच में निम्न बिंदु मुख्य होंगे :

  • पहली जांच के सभी बिंदु से जुडी बातें
  • बुखार
  • योनी से स्त्राव
  • स्तनों में सुजन
  • आलस या तबियत ख़राब लगना
  • प्रसव के बाद अवसाद के लक्षण
  • नाडी, रक्तचाप एवं तापमान
  • पेट की जांच कर गर्भाशय का पुनः सामान्य आकार में आने की पुष्टि करना

साथ ही आपको आपके आहार से जुड़े निर्देश दिए जाएंगे तथा गर्भनिरोधक के बारे में भी बताया जाएगा।

 

बच्चे की जांच के मुख्य बिंदु:

  • पहली जांच के बिंदु
  • बच्चे में दुग्धपान, सांस लेने आदि की आदतें
  • पीलिया के लक्षण
  • नाडी में सुजन
  • शौच के साथ रक्त का बहना
  • शरीर में किसी तरह की विकृति का दिखना

इसके अलावा शुरुआती 6 महीने तक बच्चे को सिर्फ दुग्धपान ही करवाएं तथा इस बारे में जानकारी लें। टीकाकरण की जानकारी भी आपको इसी जांच में दी जाएगी।

 

चौथी जांच: प्रसव के छह हफ्ते बाद।

 

माँ की जांच के मुख्य बिंदु: 

  • रक्तस्त्राव रुक गया है या नहीं
  • क्या माहवारी दुबारा शुरू हो चुकी है
  • पेशाब करने में कोई परेशानी है
  • आलस और थकान महसूस होना
  • दुग्धपान में समस्या
  • रक्तचाप
  • योनी में सुजन या मवाद की आशंका
  • स्तनों की जांच

साथ ही आपको आहार और आराम से जुडी जानकारियां भी दी जा सकती हैं।

 

बच्चे की जांच के मुख्य बिंदु :

  • बच्चे का टीकाकरण
  • दुग्धपान की आदतें
  • बच्चे के वजन में बढ़ोतरी
  • किसी और समस्या की आशंका
  • क्या बच्चा सुस्त रहता है

साथ ही फिर इस बात पर जोर दिया जाएगा की बच्चे को सिर्फ दुग्धपान ही करवाना है। ज़रूरी टीके और सावधानियाँ भी आपको बताई जाएंगी।

 

इसके अलावा अगर बच्चे का वज़न बहुत कम है तो आपको तीन और जांचों की ज़रूरत होगी जो 14वें, 21वें और 28वें दिन पर होंगी।