जानिए ब्रेन ट्यूमर होने के कारण, लक्षण व ईलाज

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image credit: ngm.nationalgeographic.com

ब्रेन ट्यूमर एक जानलेवा बीमारी है जिसके मामले तेज़ी से बढ़ रहे हैं। फिर भी इसके स्पष्ट कारण अब तक स्थापित नहीं हो पाए हैं। माना जाता है की जिन बच्चों के सिर के पास अक्सर रेडिएशन का प्रभाव रहता है उनमें बड़े होकर ट्यूमर पैदा होने की सम्भावना ज्यादा हो जाती है। साथ ही ली फ्रौमेनी सिंड्रोम आदि दुर्लभ रोगों में भी इसकी सम्भावना बढ़ जाती है। उम्र भी इसमें एक बड़ी भूमिका निभाती है; 65-79 की उम्र के बीच के व्यक्ति ब्रेन ट्यूमर के कुल रोगियों का एक बड़ा हिस्सा होते हैं।

 

आइये, इस खतरनाक बीमारी के बारे में जानें-

 

ट्यूमर क्या है?

ट्यूमर कोशिकाओं का एक गुच्छा होता है जो असामान्य कोशिकाओं के संचय से बना होता है। सामान्य तौर पर आपके शरीर में कोशिकाएं बनती और मरती रहती हैं। पर ट्यूमर की कोशिकाएं शरीर में बिना ज़रूरत के ही बनने लगती हैं तथा बहुत लम्बे समय तक जीवित रहती हैं। समय के साथ ट्यूमर में ज्यादा कोशिकाएं इकट्ठा होकर अंगों की क्रियाओं में बाधा उत्पन्न करती हैं।

प्राइमरी ट्यूमर मस्तिष्क और स्नायु तन्त्र की कोशिकाओं से बनता है तथा इन्ही कोशिकाओं के नाम स जाना जाता है। दूसरी ओर सेकेंडरी ट्यूमर मस्तिष्क के बाहरी आवरण की कोशिकाओं से बनता है।

ट्यूमर दो तरह के होते हैं-निशक्त व् घातक।

निशक्त ट्यूमर कैंसर को जन्म नहीं देते पर घातक ट्यूमर देते हैं। ब्रेन ट्यूमर दुसरे अंगों तक नहीं पहुँचता पर स्नायु तन्त्र के विभिन्न हिस्सों पर प्रभाव डाल सकता है।

ब्रेन ट्यूमर के लक्षण क्या हैं?

ट्यूमर के प्रकार और जगह के अनुसार इसके लक्षण अलग अलग होते हैं। कई मामलों में शुरुआत में कोई भी लक्षण नजर नहीं आते हैं पर धीरे-धीरे तबियत बिगड़ने लगती है। अन्य मामलों में कुछ लक्षण दिख सकते हैं।

ट्यूमर का सबसे मुख्य लक्षण सिरदर्द है। ऐसे सिरदर्द सामान्य दवाओं से ठीक नहीं होते। अन्य लक्षण इस प्रकार हैं-

  • सुनने और बोलने की क्षमता में बदलाव
  • नजर में बदलाव
  • संतुलन बनाने में मुश्किल
  • चलने में मुश्किल
  • पैरों और हाथों में सुन्नता
  • याददाश्त में दिक्कतें
  • व्यक्तित्व में बदलाव
  • ध्यान लगने में मुश्किल
  • शरीर के एक हिस्से में कमजोरी

आपको यह बात ध्यान में रखनी चाहिए की इनमें से कोई भी लक्षण अन्य रोगों के सूचक भी हो सकते हैं। इसलिए लक्षण दिखते ही चिकित्सक के पास जाएं तथा मन के संशय दूर करें।

 

ट्यूमर की जांच कैसे होती है ?

जांच के लिए चिकित्सक पहले आपसे पहले लक्षणों और परिवार के स्वास्थ्य के बारे में पूछेंगे। अगर ट्यूमर का अंदेशा हो तो आपको CT स्कैन, MRI, MRA, X-रे आदि में से एक या ज्यादा जांच करवाने के लिए कहा जाएगा। इन जांचों के नतीजों के मुताबिक आगे का उपचार होगा।

ट्यूमर कैंसर बन चूका है या नहीं या जानने के लिए बाइओप्सी करवाई जा सकती है।

ट्यूमर का इलाज कैसे होता है?

सर्जरी के द्वारा ट्यूमर निकालना अमूमन पहला पहला विकल्प होता है। पर अगर जगह की वजह से ट्यूमर नहीं निकाला जा सकता तो इसे कीमोथेरेपी व् रेडिएशन थेरेपी की मदद से नष्ट करने की कोशिश की जाती है।

कैंसर के उपचार से स्वस्थ कोशिकाओं को भी नुक्सान होता है इसलिए इसके दुष्प्रभावों के बारे में चिकित्सक से अच्छी तरह चर्चा करें। असहजता कम करने के लिए सुझाए गये साधनों पर भी अमल करें। उपचार के बाद चलने, सुनने, बोलने, काम करने आदि के लिए थेरेपी लेनी की ज़रूरत हो सकती है।