समय पर डेंटल फ्लोरोसिस की पहचान, बचा सकती है आपकी मुस्कान

710
dental_fluorosis
image credits: Oral Answers

फ्लोरोसिस एक आम समस्या है जो आपके दांतों पर प्रभाव डालती है। जीवन के पहले आठ सालों में, जब दांतों का निर्माण हो रहा होता है, फ्लोराइड के उपयुक्त स्तर से ज्यादा के सम्पर्क में आने पर यह समस्या पैदा होती है। (dental fluorosis caused by fluoride, cure, treatment)

 

आइये, फ्लोरोसिस के बारे में कुछ ज़रूरी बातें जानें-

 

फ्लोरोसिस कितना आम है?

दांतों में सफ़ेद दाग दिखना फ्लोरोसिस की सबसे आम पहचान है। यह 6 से 50 साल की उम्र के व्यक्तियों में देखा जाता है हालाँकि 12-15 की उम्र में ये सबसे आम है। हर चार में से एक व्यक्ति को यह समस्या होती है। ज्यादातर मामलों में यह बिल्कुल गंभीर नहीं होती, वहीं सिर्फ 1 प्रतिशत लोगों में यह गंभीर रूप लेती है। पर शोध में देखा गया है की 21वी सदी में बच्चों पर इसका प्रभाव बढ़ता जा रहा है।

फ्लोरोसिस को चिकित्सा पद्धति में बीमारी नहीं माना जाता, पर इसके मानसिक दुष्प्रभाव हो सकते हैं तथा इसका उपचार भी आसान नहीं होता। बच्चों में फ्लोरोसिस होने पर अभिभावकों को विशेष ध्यान देने की ज़रूरत होती है।

 

फ्लोरोसिस की वजह 

फ्लोरोसिस की प्रमुख वजह फ्लोराइड युक्त दंत प्रसाधनों का अनुचित उपयोग होता है। कभी-कभी बच्चे टूथपेस्ट को थूकने की जगह गटक लेते हैं जिसकी वजह से ये समस्या उभर सकती है।

पर फ्लोरोसिस के अन्य कारण भी हैं। बचपन में सुझाई मात्रा से ज्यादा फ्लोराइड लेने से यह हो सकता है। अक्सर पीने के पानी में या कोल्ड ड्रिंक्स आदि में फ्लोराइड का स्तर बहुत ज्यादा हो सकता है जिससे फ्लोरोसिस हो सकता है।

 

फ्लोरोसिस के लक्षण 

फ्लोरोसिस के लक्षण मुश्किल के नजर आने वाले सफ़ेद धब्बों से लेकर स्पष्ट दिखने वाले भूरे इनेमल तक हो सकते हैं। इन धब्बों को साफ़ करना बहुत मुश्किल हो सकता है क्यूंकि ये दांत की बनावट का ही हिस्सा होते हैं। फ्लोरोसिस रहित दांत, दूसरी ओर, फीके सफ़ेद और चमकदार होते हैं।

अगर आपके बच्चे के दांतों में भी ऐसे ही धब्बे नजर आ रहे हैं तो चिकित्सक से ज़रूर इस बारे में चर्चा करें। इसकी वजह पता करने की कोशिश करें ताकि किसी गंभीर बीमारी का खतरा टाला जा सके।

डेंटिस्ट फ्लोरोसिस को निम्न श्रेणियों में बांटते हैं-

 

  1. शंकास्पद : दांत के बाहरी हिस्से में कुछ सफ़ेद धब्बे दिख रहे हैं जो समय के साथ बदलते हैं।
  2. बहुत कम: दांत के 25 प्रतिशत से कम हिस्से में छोटे-छोटे सफ़ेद धब्बे दिखते हैं।
  3. कम: सफ़ेद मलिन धब्बे जो दांत के 50 प्रतिशत से कम हिस्से पर फैले होते हैं।
  4. मध्यम: सफ़ेद धब्बे दांत के 50 प्रतिशत से ज्यादा हिस्सा पर होते हैं।
  5. गंभीर:दांत की पूरी सतह धब्बों से ढक जाती है।

 

फ्लोरोसिस का उपचार –

ज्यादातर मामलों में फ्लोरोसिस इतना कम होता है की किसी भी उपचार की ज़रूरत नहीं पडती है। मध्यम से गंभीर श्रेणियों में फ्लोरोसिस को कई तकनीकों की मदद से ठीक किया जाता है। ज्यादातर तरीके धब्बों को छुपाने के लिए अपनाए जाते हैं।

 

ऐसी ही कुछ तकनीकें इस प्रकार है-

  • दांत सफ़ेद करने के लिए ब्लीचिंग करना तथा दांत की सतह साफ़ करने के लिए अन्य तरीके अपनाना।
  • बोन्डिंग, जिसमें दांत को एक सख्त राल से ढका जाता है।
  • क्राउन
  • विनियर, जो दांत को सामने से ढकने के लिए एक खोल होता है। यह गंभीर फ्लोरोसिस के लिए अपनाया जाता है।
  • MI पेस्ट, जो दांत के धब्बे को कम करने में प्रभावी है।

 

फ्लोरोसिस से सुरक्षा 

अभिभावकों की निगरानी फ्लोरोसिस से बचाव में अहम भूमिका निभाती है। अगर आपका पानी सार्वजनिक स्रोतों से आता है तो सरकारी विभाग या चिकित्सकों से पानी में फ्लोराइड की मात्रा पता लगाई जा सकती है। डिब्बाबंद पानी लेते हैं तो पास की लैब में पानी का सैंपल ले जाकर आप फ्लोराइड की मात्रा का पता लगाएं। इसके बाद बच्चों द्वारा अक्सर पिए जाने वाले पेयों में भी फ्लोराइड की मात्रा का पता लगाएं। इसके बाद फ्लोराइड की ज़रूरी मात्रा पता करें तथा इसकी कमी या अधिकता का अनुमान लगाएं।

अपनी इस गणना को अपने चिकित्सक से भी सांझा करें तथा उनके मार्गदर्शन को पालन करें।