जानिए मॉनसून से सम्बंधित रोग तथा बरती जाने वाली सावधानियां

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image credits: slideshare

बारिश का मौसम यानी जीवाणुओं के प्रजनन तथा वृद्धि के लिए एकदम उपयुक्त मौसम। ठहरे हुए पानी से बहुत सी बीमारियाँ पनपती है जिससे बहुत से लोगों पर दुष्प्रभाव होता है। मॉनसून का मौसम स्वास्थ्य के लिए कई बार बुरा साबित हो सकता है।

तो आइये जानते हैं मॉनसून में होने वाली कुछ बीमारियों के लक्षण ताकि आप समय रहते सचेत हो सकें-

  1. मच्छर से उत्पन्न होने वाले रोग:

यह बीमारियाँ मुख्यतः ठहरे हुए पानी से उत्पन्न होती हैं जोकि मच्छरों के फैलने का आदर्श जरिया है। और मच्छर सिर्फ बड़ी मात्रा में इकट्ठे हुए पानी में नही बल्कि कूलर, टायर या किसी भी कंटेनर में इकट्ठे हुए पानी में भी पनप सकते हैं। ये मच्छरों के प्रजनन के लिए मुख्य श्रोत जैसी जगहें हैं। मच्छरों से उत्पन्न होने वाली कुछ आम बीमारियाँ-

 

मलेरिया के लक्षण:

  • ठण्ड लगने के साथ तेज बुखार ( सामान्यतः काटने के 24 घंटे के भीतर)
  • बदन दर्द
  • पसीना तथा ठण्ड लगने जैसे लक्षण
  • दस्त तथा पीलिया भी हो सकते हैं
  • डेंगू: डेंगू मॉनसून के समय होने वाली सबसे खतरनाक बीमारी है, जो एंडीज नामक मच्छर के काटने से होता है। जो सामान्यतः दिन के समय काटता है।

डेंगू के लक्षण:

  • मच्छर के काटने के 4 से 7 दिनों के भीतर तेज बुखार
  • मांसपेशियों तथा जोड़ों में गंभीर दर्द
  • शरीर पर चकत्ते
  • आँखों के पिछले हिस्से में दर्द
  • भूख में कमी
  • मसूढ़ों से खून आना

सावधानी:

  • पूरी बांह के कपडे पहनें।
  • अपने साथ एक मच्छर विरोधी क्रीम, स्प्रे या कलाई में बाँधा जाने वाला बैंड अवश्य रखें।
  • अपने आस-पास के पानी के ठहराव से बचें, अपने स्थानीय नगर पालिका अधिकारियों से मच्छर भगाने वाली दवा का छिडकाव करवाएं।
  • रात में मच्छरदानी का प्रयोग करें।
  1. पानी की वजह से होने वाली बीमारियाँ:

जिन इलाकों में स्वच्छता तथा नालियों इत्यादि की संपूर्ण व्यवस्था नही होती, वहां दूषित भोजन या पानी के माध्यम से रोगों के फैलने का खतरा बहुत बढ़ जाता है। सड़क विक्रेताओं द्वारा अस्वस्थ तथा खुले में बिक रहे भोजन तथा पेय पदार्थ इसका कारण हो सकते हैं। आइये देखते है कुछ बीमारियों के होने के कारण तथा उसके लक्षण:

हैजा के लक्षण:

  • गंभीर डायरिया तथा उल्टियां
  • डिहाइड्रेशन के कारण तेजी से वजन घटना तथा मांसपेशियों में ऐंठन
  • निम्न रक्त-चाप
  • नाक, मुह, गले तथा पलकों सहित शुष्क श्लेष्म झिल्ली
  • टाइफाइड बुखार- टाइफाइड बुखार सालमोनेला बैक्टीरिया से दूषित भोजन या पानी के कारण होता है। यह बैक्टीरिया कई हफ़्तों तक सूखे मॉल तथा पानी में जीवित रह सकता है। तथा आमतौर पर यह व्यक्ति के शरीर में मल मूत्र त्याग के मार्ग से प्रवेश करता है।

टाइफाइड के लक्षण:

  • कमजोर पाचन तथा सुस्ती
  • 104 डिग्री फारेनहाइट तक बुखार
  • पेट में दर्द
  • दस्त या कब्ज
  • सिर दर्द तथा बदन दर्द
  • हेपेटाईटिस A- यह एक संक्रामक बीमारी है जो हेपेटाइटिस A वायरस से प्रदूषित भोजन, पानी, संक्रमित मल तथा संक्रमित व्यक्ति के साथ संपर्क के माध्यम से फैलता है। यह रोगी से बिना शरीर के संपर्क बनाये नही फैलता है। इस वायरस के लक्षण आमतौर पर 2-7 सप्ताह के बाद विकसित होते हैं।

हेपेटाइटिस A के लक्षण:

  • जी मिचलाना
  • पीलिया होना (त्वचा तथा आँखों का रंग पीला पड़ना)
  • भूख न लगना
  • मिटटी के रंग का मल

सावधानी:

  • संभावित दूषित भोजन या पानी के सेवन से बचें।
  • व्यक्तिगत स्वक्षता का सख्ती से ख्याल रखें।
  • अधिकाँश बीमारियाँ दूषित पानी से उत्पन्न होती है, इसका ख्याल रखें।
  • भोजन तथा पानी को मक्खियों से बचाने के लिए कवर करके रखें।
  • कोई भी परेशानी होते ही चिकित्सक से मिलें, इन बीमारिओं को हल्के में न लें।
  • दस्त से होने वाले निर्जलीकरण से बचने के लिए ओ.आर.एस का घोल थोड़ी-2 मात्रा में लेते रहें।