युवाओं में बढ़ रहे हैं हार्ट अटैक के मामले

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Heart-Disease
image credits: SaludMovil.com

भारत में हार्ट अटैक आने की औसतन उम्र पश्चिमी देशों के मुकाबले 10 साल कम है। चेन्नई में हुए एक शोध में पाया गया की भारत में हार्ट अटैक के कुल मामलों में से 22 प्रतिशत 40 से कम उम्र के लोगों को तथा 5 प्रतिशत 20-30 की उम्र के लोगों में देखे जाते हैं। भारत में मधुमेह की आशंका ज्यादा होना भी कम उम्र में हार्ट अटैक से जोड़कर देखा जाने लगा है।

 

युवावस्था में हार्ट अटैक होना एक बड़ी समस्या है; ज्यादातर मामलों में इसके लक्षणों को नज़रंदाज़ किया जाता है तथा कई बार स्वयम चिकित्सक भी लक्षणों को गैस या मांसपेशी का दर्द मान बैठते हैं। इसी वजह से ज्यादातर युवा तकलीफ होते हुए भी ECG नहीं करवाते और हार्ट अटैक से बचने के कोई उपाय नहीं अपनाते।

 

पुरुषों में अटैक की ज्यादा सम्भावना 

हर तरह से यह साबित हो चूका है की महिलाएं पुरुषों की तुलना में ज्यादा जीती हैं। विकसित देश हो या विकासशील देश, औसत रूप से पुरुषों में मोटापे की संभावना कम होती है, वे ज्यादा ताकतवर और ऊँचें होते हैं। पर सेहत की नजर से इन में से कोई भी गुण पुरुषों की मदद करता हुआ नजर नहीं आता।

दरअसल महिलाओं में एस्ट्रोजन नामक हॉर्मोन कई अद्भुत लाभ देता है। यह ह्रदय की सेहत के लिए हितकर है, बुरा कोलेस्ट्रोल कम करता है तथा अच्छे कोलेस्ट्रोल को बढ़ता है। यह एक एंटीऑक्सीडेंट भी है जो शरीर से विषाक्त तत्वों को बहर करता है। इसी वजह से महिलाओं में मीनोपॉज के पहले हार्ट अटैक की संभावना बहुत कम होती है।

 

महिलाओं में भी बढ़ रहे हार्ट अटैक के मामले 

पिछले दो दशकों में कम उम्र की महिलाओं को हार्ट अटैक होने के मामले बढ़े हैं। ज्यादातर वैज्ञानिक इसका कारण तनाव, गर्भाशय को निकालना तथा खाने की आदत में बदलाव मानते हैं।

 

क्या मुझे हार्ट अटैक हो सकता है?

युवाओं को बात बात ध्यान में रखनी चाहिए की ह्रदय की धमनियों का यह रोग समय के साथ धीरे-धीरे बढ़ता है। अटैक चाहे अचानक क्यों न आए, पर ह्रदय का कमजोर होना बहुत पहले ही शुरू हो चूका होता है। इस क्षति को उलटने का लगभग कोई तरीका नहीं है।

हार्ट अटैक होने के दो कारण हो सकते हैं- जिन्हें बदला न जा सके, जैसे पुरुष लिंग, उम्र व् अनुवांशिक कारण तथा जिन्हें बदला जा सके, जैसे मधुमेह, तनाव, कोलेस्ट्रोल, धुम्रपान, निष्क्रिय जीवनशैली तथा अस्वस्थ आहार।

आप जितने ज़्यादा कारणों को अपने जीवन में जगह देंगे, हार्ट अटैक का खतरा उतना ज्यादा ही आप पर मंडराने लगेगा।

 

इस रोग से कैसे बचा जा सकता है?

उपचार से बेहतर बचाव होता है; यह कीवदंती ह्रदय रोग के मामले में पूरी तरह सत्य है। नियमित चेकअप, सही जीवनशैली, अच्छी आदतें और मधुमेह आदि रोग होने पर पूरी देखभाल आपकी बड़ी मदद कर सकती है। साथ ही पेट पर जमी वसा को घटाना आपके दिल को सेहतमंद रखने की दिशा में बड़ा मददगार साबित हो सकता है।

 

छाती में दर्द होने पर मुझे क्या करना चाहिए?

छाती में थोड़ी भी असहजता महसूस होने पर आप इसे हार्ट अटैक की ही तरह देखें तथा तुरंत चिकित्सक के पास जाएं। उनसे आग्रह कर ECG करवाएं। यह जांच ज्यादातर जगहों पर 100 रूपए के अंदर की जाती है। किसी तरह की समस्या लगने पर चिकित्सक आपका उपचार शुरू करेंगे। साथ ही आप धीरे-धीरे विभिन्न तरह के छाती के दर्द को समझने लगेंगे और आगे चलकर सम्भावित हार्ट अटैक को समय के पहले ही पहचान जाएंगे।

 

हार्ट अटैक के लक्षण 

गले से पेट के बीच किसी भी तरह का दर्द, जल्द, भारीपन या दबाव अनुभव करना खासकर जब आप चल रहे हों, वजन उठा रहे हों या सीढ़ी चढ़ रहे हों तो यह दिल के दर्द की शिकायत हो सकती है। 50 प्रतिशत मामलों में हार्ट अटैक आने के 1-2 हफ्ते पहले ही ऐसे लक्षण नजर आने लगते हैं। आप भी इन सूचकों पर ध्यान दें और सही समय पर सही कदम उठाएं।