जानिए क्या क्या समस्याएं हो सकती हैं खुले में शौच जाने से

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image credits: IndianFolk

खुले में शौच का अर्थ है घर के बाहर ऐसे स्थान में जाकर शौच करना जिसकी रचना मलविसर्जन के लिए नहीं की गयी है। इस आदत को एशिया और अफ्रीका के ग्रामीण क्षेत्रों से जोड़कर देखा जाता है और इसकी वजह क्षेत्र और लोगों की गरीबी कही जाती है। (khule mein soch jane se bimaariyan, open defecation originated problems in hindi)

 

खुले में शौच करने वालों की संख्या विश्व में सबसे ज्यादा भारत में ही है। इसकी एक वजह गरीबी भी है लेकिन कई सम्पन्न परिवारों में भी खुले में शौच को अच्छी आदत माना जाता है। भारत का एक वर्ग मानता है की जिस घर में रहा जाता है या जिस आँगन में पूजा की जाती है वहाँ टॉयलेट/शौचालय नहीं बनाया जाना चाहिए। इसके अलावा घर के बड़ों द्वारा उपयोग किए जाने वाले शौचालय का बहुओं द्वारा उपयोग न करना या शौचालय का मनोरम और स्वच्छ न होना जैसे कारण भी लोगों को खुले में शौच करने पर बाधित करते हैं।

 

पर शायद हम यह भूल जाते हैं की यह आदत हमारी सेहत और पर्यावरण को कई तरह से नुकसान पहुंचा देती है।

 

खुले में शौच करने का स्वास्थ्य पर असर

 

पानी से होने वाले रोग:

अक्सर देखा जाता है की लोग खुले में शौच करने के लिए पानी के स्रोतों के आस-पास के स्थान चुनते हैं। ऐसा न भी होने पर बारिश के पानी से बहकर शौच इन स्रोतों तक पहुँच जाता है। ऐसे पानी का सेवन सेहत पर बहुत बुरा प्रभाव डाल सकता है।

अगर आप भी ऐसे स्रोतों का पानी पीने के लिए या खाना पकाने के लिए करते हैं तो आपके परिवारजन को दस्त, टाइफाइड, ट्रेकोमा, कॉलरा जैसे गंभीर रोग हो सकते हैं। यह सबसे ज्यादा घर के बच्चों, बूढों, गर्भवती महिलाओं और रोगियों पर प्रभाव डालेंगे। अगर आपके गाँव या शहर में कोई बीमारी फ़ैल रही है तो इस पानी के ज़रिये यह बीमारी आपके घर तक भी पहुँच सकती है।

 

संचालन से होने वाली बीमारियाँ:

जब शौच खुले में पड़ा रहता है तो यह मक्खियों और कई अन्य कीटों को आमंत्रित करता है। शौच पर बैठने के बाद जब मक्खियाँ आस-पास की जगह घुमती हैं तथा खाने और पानी पर बैठती है तो शौच में मौजूद कीटाणुओं को इनपर छोड़ जाती हैं। इन संक्रमित चीज़ों का सेवन करने पर आप अनजाने में उन रोगों के शिकार हो जाते हैं जो शौच करने वाले को थे।

इस तरह कॉलरा/ हैजा तेज़ी से फैलता है जो बहुत ही गंभीर रोग है।

 

बीमारियों का खत्म न होना:

खुले में शौच का सबसे दुखद प्रभाव यह है यह बीमारियों का एक चक्र बना देता है। इस अस्वच्छ आदत से आपको दस्त, ख़राब पाचन और सेहत ख़राब लगना जैसी मुश्किलें हो सकती हैं। अक्सर ऐसे रोगों में लोग शौच के लिए घर से बहुत दूर न जाकर पास ही कोई स्थान ढूंढ लेते हैं।

ऐसा करने पर पानी और कीटों के ज़रिये बीमारी दुबारा आपके घर आती है और रोग का यह चक्र चलता जाता है। ऐसे में अगर आप रोगी न भी हों तो भी आपको जल्द कोई न कोई बीमारी हो जाने की आशंका रहती है जिससे आप आसानी से बाहर नहीं निकल पाते।

 

बच्चों में कुपोषण:

अक्सर हम बच्चों में कुपोषण की वजह सम्पूर्ण आहार की कमी को मानते हैं। पर खुले में शौच करने से अगर बच्चे को कोई रोग हो जाए तो उसके शरीर में पानी की कमी हो जाती है तथा उसकी भूख घट जाती है। इसकी वजह से भी बच्चे में कुपोषण की समस्या हो सकती है।

इन सभी वजहों से बच्चों में विकास रुक जाता है और रोग प्रतिरोधक क्षमता कम हो जाती है। इस तरह बच्चे कमजोर रह जाते हैं तथा उन्हें निमोनिया और टीबी हो सकता है।

 

सेहत पर होने वाले दुष्प्रभावों के अलावा खुले में शौच करने से पर्यावरण को भी गंभीर नुकसान होता है।

 

इन सभी बिंदुओं को ध्यान में रखकर शौच के लिए सही स्थान और प्रसाधन का उपयोग करें तथा लोगों को भी खुले में शौच करने से रोकें।