डिप्रेशन से निपटने के लिए युवा लें मेडिटेशन का सहारा

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image credits: www.cmu.edu

समय के साथ युवाओं में धर्म और अध्यात्म के प्रति नज़रिया बदल रहा है। एक शोध के अनुसार 30 प्रतिशत युवा स्वयम को आध्यात्मिक मानते हैं लेकिन धार्मिक नहीं। डिप्रेशन के बढ़ते मामलों में भी अक्सर थेरेपी के दौरान युवा रोगी धर्म, भगवान व् अध्यात्म की बात करते हैं। फिर भी अवसाद के उपचार में चिकित्सक दिमाग के ढांचें और समझ व् व्यवहार की नज़र से समस्या समझने की कोशिश करते हैं। यही वजह है की आध्यात्म के बारे में सुलझा हुआ नजरिया रखने की ज़रूरत है।

गौर करने वाली बात यह भी है की वैश्वीकरण के साथ समाज में हम इन बातों पर खुलकर बात करने से हिचकिचाने लगे हैं। धर्म व् अध्यात्म एक निजी विषय बन गया है जिसे परिवार के साथ साझा करना भी ज़रूरी नहीं समझा जाता। इस स्थिति को बदलकर अगर अध्यात्म के पहलुओं को तार्किक और आधुनिक रूप में रखा जाए तो कई मानसिक रोगियों का उपचार सरल हो सकता है।

 

आइये जानते हैं तनाव और अवसाद से गुज़रने पर आप किस प्रकार अध्यात्म की मदद ले सकते हैं-

 

आशावान बनें 

अध्यात्म या ऐसे प्रबंधन पर विश्वास, जो आपसे कहीं बड़ा है, आपको जीवन की राह में उम्मीद से भरा रख सकता है। सक्रात्मक बदलावों के प्रति आशावान रहना आपको कल्पना में जीने वाला व्यक्ति नहीं बनाता बल्कि वास्तविकता में अच्छे नतीजे ला सकता है।

55 की उम्र के बाद ह्रदय रोग के कारण सर्जरी से गुजरने वाले 232 लोगों पर एक शोध किया गया। इस दौरान पाया गया की जो रोगी अटूट विश्वास और धार्मिक सहजता पा रहे थे वे सर्जरी के बाद ज्यादा स्वस्थ रहे तथा ज्यादा लम्बे समय तक जीवित रहे। इस प्रभाव का रोगी के धर्म से कोई नाता नहीं पाया गया।

जीवन में अक्सर ऐसे मोड़ आते हैं जहाँ परिस्थिति आपके नियन्त्रण के बाहर होती है। ऐसी ही स्थिति में अवसाद सबसे ज्यादा घेरता है। ऐसे समय में अपने जीवन से बड़ी शक्तियों पर भरोसा करें तथा इन्हें समझने की कोशिश करें। उम्मीद और समझ आपको जल्द ही अवसाद और समस्या से उबरने में मदद करेगी।

 

तनाव और घबराहट से निपटने के नये तरीके 

कई बार किसी भी तरह की थेरेपी या दवा आपकी मदद करने में अक्षम हो जाती है। ऐसे समय में भी उम्मीद न छोड़ें और बेहतर जीवन की तलाश में आगे बढ़ते रहें। डर, चिंता व् अवसाद से उबरने के लिए आपको पहले इसे स्वीकार करना होगा तथा इससे निपटने के लिए साथ ढूँढना होगा।

प्रार्थना ऐसे में आपकी मदद कर सकती है। विभिन्न धर्मों में प्रार्थना के ज़रिये मन को शक्ति, एकाग्रता और स्वास्थ्य देने के प्रबंध किये गये हैं। आप चाहे तो इन्हें अपनाएं या स्वयं के लिए एक प्रार्थना बनाएं जिसे आप रोजाना तय समय पर पूरी एकाग्रता के साथ पढ़ सकें। इसके अलावा अभिवचन या स्वयम से सकरात्मक बातें कहना भी आपको ज़रूरी शक्ति देगा।

 

नजरिये को सकरात्मक बनाएं 

अध्यात्म से जुड़े अभ्यास में भाग लेना, चाहे वो ध्यान हो, प्रार्थना हो या प्रकृति के साथ समय बिताना, आपके अंदर सकरात्मक बदलाव ला सकता है। आप जल्द ही अपने अंदर हो रहे मनोदशा के बदलावों को पहचान कर नियंत्रित कर पाएंगे तथा जल्द ही स्वयम पर भरोसा करने लगेंगे।

 

समस्या का दूसरा पहलु देखें 

जब आप जीवन को अध्यात्म के नजरिये से देखते हैं तो समस्याएँ रूकावट नहीं, बल्कि सीखने का माध्यम होती है। हर बार नयी समस्या के आते ही आप स्वयम से पूछते हैं-मैं क्या सीख सकता हूँ? इस रूकावट के रूप में कौनसे अवसर सामने आए हैं? इस तरह समस्याएँ आपको उत्साहित करेंगी और जीवन में निरंतर बढते रहने में मदद करेगी।