बिग माइंड ध्यान क्रिया – सुनें अपने मन की

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image credits: www.cmu.edu

हम सभी जानते हैं की ध्यान के द्वारा हमारा मन शांति अनुभव करता है। पर इसका अर्थ यह नहीं की आप मन में उठने वाले सभी विचारों को बनने से पहले ही दबाने की कोशिश करें। (meditation for concentration and focus in hindi) जेंपो रोशी द्वारा बनाई गयी बिग माइंड (विशाल मन) ध्यान क्रिया आपके मन की इन्हीं आवाज़ों को सुनते हुए शांति और संतोष की ओर ले जाती है।

जानिए कैसे इस ध्यान क्रिया के द्वारा आप अपने मन के विचार को सुन और समझ सकते हैं तथा मन को शांत और संतुलित बना सकते हैं-

 

  1. अगर आप अक्सर ध्यान करते हैं तो ध्यान के इसी तरीके का 1-2 मिनट तक अभ्यास करें और मन को स्थिर करें। अगर आप ध्यान करने की शुरुआत कर रहे हैं तो एक आरामदायक जगह पर बैठें तथा अपनी साँसों पर 5 मिनट तक ध्यान टिकाएं।

 

  1. इस आरामदायक अवस्था में आकर अपने आप से एक गुरु या मालिक की तरह बात करें। यह पढने में आपको अजीब लग सकता है लेकिन हम सभी लगभग हमेशा अपने आप से बात करते हैं। यह दरअसल हमारा अहम है जिसका काम आपको नियंत्रित करना है।

 

  1. अपने अहम् या नियन्त्रण करने वाली इस आवाज़ से पूछें की यह क्या काम करता है- किसे नियंत्रित करता है तथा इसे क्या पसंद या नापसंद है। इस ध्यान क्रिया में हम कोशिश कर रहे हैं की हम इस अहम का सहयोग करें, न की इससे लड़ाई करके चुप करवाने की। आख़िरकार आपका अहम अपना ही काम कर रहा है।

 

  1. अब जब आपके अहम का भरोसा आपके पास है तो इससे मन की बाकी आवाजें सुनने की आज्ञा मांगे-आपका अहम अपने आप शांत होकर दूसरी आवाजें सुनने देगा।

 

  1. अब अगली आवाज़ है संदेहवादी। इस आवाज़ की ओर जाने के पहले कुछ देर साँसों पर ध्यान लगाएं ताकि यह बदलाव सुगम हो जाए।

 

  1. अब अपनी संदेहवादी आवाज़ को भी अपनी कहने दें। कई बार हम इस आवाज़ से भी लड़ने की कोशिश करते हैं-लेकिन दुनिया के अनुभवी व्यक्ति जानते हैं की संदेह होना कोई गलत बात नहीं है पर संदेह न होना आपको बहुत नुकसान पहुंचा सकता है। इसलिए अब अपनी संदेहवादी आवाज़ से पूछें की उसे किन बातों पर संदेह है।

 

  1. इन सवालों के जवाब मिलने के बाद कुछ देर गहरी साँसें लें तथा अपने खोजी मन की ओर बढ़ें। मन के इस हिस्से की आवाज़ आपको अपनी आशाएं और चाहते बताएंगी जिससे अक्सर कई योगी झुझते हैं तथा दूर रहने में भलाई मानते हैं। पर आपके मन में उत्सुकता और आशाएं होने का सीधा अर्थ है की आप आज से कुछ बेहतर होना चाहते हैं-यही जीवन का मुलभुत नियम भी है इसलिए इसे स्वीकारें। सच कहें तो मन की इस आवाज़ के बिना आप न ही यह लेख पढ़ रहे होते और न ही ध्यान कर रहे होते। ध्यान के इस चरण में मन से उसकी इच्छाएँ जानें।

 

  1. अब एक और गहरी सांस लें तथा स्थिर मन की ओर बढ़ें। मन के इस हिस्से को किसी खोज में दिलचस्पी नहीं है; यह न ही कहीं और जाना चाहता है और न ही कुछ और करना चाहता है। इसी अवस्था में आपका ध्यान लगता है। मन के इस पहलु को सहजता से समझें।

 

  1. इस स्थाई अवस्था में अपनी क्रिया के सफ़र को समझें- ध्यान करें की एक आवाज़ से दूसरी आवाज़ की ओर बढना कितना आसान या मुश्किल था। आप अब समझ पाएंगे की आपकी पहचान “मैं गुस्सैल हूँ” या “मैं शर्मीला हूँ” जैसे सीधे वाक्यों से नहीं हो सकती। दरअसल आपकी पहचान इन आवाज़ों के बदलने पर लगातार बदलती है लेकिन इस बीच आप कहीं नहीं हैं। आप तो इन सभी से अलग हैं।

 

  1. अपनी इस पहचान को समझते ही इसमें सहजता से स्थित हो जाएं। इसी पहचान को दुनिया में बिग माइंड, वैश्विक मन, ईश्वर या अन्य नामों से जाना जाता है तथा अनंत माना जाता है। जी हाँ, यह विशाल चेतना आपके अंदर ही है और इसका काम है हर जगह होना।

 

  1. इस वैश्विक चेतना से मन में उठने वाले सवाल पूछें- क्या इसमें आपका जन्म भी समाया है? क्या आपके माता-पिता भी इससे जन्में हैं? क्या इसका कोई छोर है? क्या इसमें आपकी कोई आवाज़ भी समाती है? क्या ये आपको और आपकी परेशानियों को देखती है?

 

  1. चेतना की इस अवस्था में जब तक रहना चाहें, रहें। अब आपका अहम्, आपकी इच्छाएँ, आपके संदेह और बाकी सभी आवाजें भी आपके और इस वैश्विक चेतना के बीच से हट चुकी हैं।

 

  1. इसी दौरान आपकी वैश्विक ह्रदय से भी मुलाकात होगी। जानें की यह क्या करता है तथा दूसरों के लिए इसकी क्या भूमिका है। चेतना के इस हिस्से का काम संवेदना है जिसे आप ध्यान में स्थित होते ही पाएंगे। अपने प्रश्नों के उत्तर जाननें का प्रयास करें- किसी को चोट लगने पर इसे कैसा महसूस होता है? क्या यह सौम्य देखभाल का रूप लेता है, प्रेम के सख्त रूप लेता है या सभी रूपों को अपने अंदर रखता है?क्या जीवन में अक्सर मुश्किलें मिलने पर यह अपना रूप बदलता है? इस आवाज़ के साथ कुछ देर बैठें।

 

  1. अब अपने स्थिर मन की ओर वापस जाएं तथा इसे ध्यान समाप्त करने के लिए कहें। हो सकता है की आप अपने अंदर मिली इन आवाज़ों के साथ रुके रहना चाहें, लेकिन ध्यान रखें की कोई भी आवाज़ आपके रुकने की जगह नहीं हो सकती। ध्यान से बाहर आएं और एक नए जीवन के दर्शन करें। इस क्रिया को नियमित रूप से करना न भूलें।

 

इस क्रिया को सीख लेने के बाद इसे नियमित रूप से करें। आप पाएँगे की आपके अंदर और भी कई आवाजें हैं जिनसे मिलकर आप जीवन को और भी बेहतर ढंग से समझ सकते हैं। मन के इन पहलुओं को साथ खेलें तथा जीवन के प्रति एक नए नज़रिए को जानें।