जानिए क्या है ‘कुपोषण मुक्त भारत’ स्कीम

356
image credits: Save the Children

“मैं बेचैन हूँ, मैं बेसब्र हूँ, मैं व्याकुल हूँ” इन शब्दों के साथ हमारे देश के प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने स्वंत्रता दिवस पर कुपोषण से नई लड़ाई का संकल्प लिया। इतना ही नहीं, अगले कुछ हफ्तों में उन्होंने संवाद नामक कार्यक्रम का आयोजन किया जिसमें जड़ों पर काम करने वाले कार्यकर्ता-आंगनवाडी, आशा और ANM कार्यकर्ता से सीधी बात की। यह पहली बार था जब किसी प्रधानमंत्री ने सीधे इन कार्यकर्ताओं से बात कर उनके प्रयासों को सराहा हो।

‘संवाद’ में मोदी ने 3000 अग्रमी कार्यकर्ताओं को सम्बोधित किया तथा कईयों को नाम लेकर पुकारा। उनकी यह कोशिश बड़ा फर्क ला सकती है-वहां बैठा हर कार्यकर्ता 250 परिवारों की महिलाओं और बच्चों की सेहत पर प्रभाव डालता है। ऐसे में यह छोटा सा कार्यक्रम 34 करोड़ लोगों के जीवन को छु सकता है।

POSHAN full form (PM’s Overarching Scheme for Holistic Nourishment)

पोषण 

प्रधानमंत्री ने झुंझुनू से मार्च में शुरू हुई POSHAN(प्राइम मिनिस्टर ओवेरार्किंग स्कीम फॉर होलिस्टिक नौरिश्मेंट) अभियान पर जोर दिया। इस अभियान की मदद से अलग अलग विभागों द्वारा चलाई जा रही कुपोषण से जुडी योजनाओं को एक सूत्र में पिरोने में मदद मिलेगी। स्वास्थ्य मंत्रालय और महिला एवं बाल विकास मंत्रालय के बीच हमेशा से रहा घर्षण भी इस अभियान से घटने की उम्मीद है।

भारत देश में हर पांच में से 2 बच्चे कुपोषण का शिकार हैं। सालों से अनगिनत योजनाओं के ज़रिये हर स्तर पर इन आंकड़ों को बदलने की कोशिश रही है। मोदी मुख्यमंत्री की भूमिका में इस समस्या की जटिलता को समझ चुके हैं इसलिए पोषण अभियान की ज़रूरत पूरी करने की दिशा में कार्य कर रहे हैं।

 

पोषण अभियान की मुख्य बातें 

नीति आयोग ने अभूतपूर्व तेज़ी दिखाते हुए हर माह के लिए एक एक्शन प्लान तैयार किया है जिसमें पोषण, विभिन्न विभागों का सामंजस्य, सामग्रियों का मानक तैयार करना, सेवा प्रदाताओं को योजनाबद्ध करना एवं यूनिसेफ, टाटा ट्रस्ट आदि स्नग्न्थ्नों को जुटाना शामिल है।

सरकार ने अपने लिए लक्ष्य तय किये हैं; कुपोषित बच्चों में 2 प्रतिशत की कमी तथा एनीमिया से ग्रसित बच्चों में 3 प्रतिशत की कमी आदि। साथ ही प्रगति पर निगरानी रखने के लिए छह साल की जगह हर साल सर्वे करने का लक्ष्य रखा गया है। हर साल कुपोषण के ताज़े आंकड़े सामने आना इसे चुनावों में भी बड़ा मुद्दा बना सकता है।

 

भारत में कुपोषण की समस्या क्यों है?

आप शायद यह जानकर चौक जाएंगे की भारत में कुपोषण के आंकड़े अफ्रीका के कुछ इलाकों से भी ख़राब हैं। इसकी वजह हमारी सामाजिक प्रणाली भी है- महिलाओं कम उम्र में विवाहित होती है, कम उम्र में ही माँ बनती हैं तथा घर में सभी को भोजन करवाने के बाद बचा-कूचा खाना खाती हैं। ऐसे में माँ में कम वज़न, खून की कमी तथा पोषण की कमी हो जाती है। कुपोषित माँ से जन्में बच्चे भी कुपोषित होते हैं।

कुपोषण से मुक्ति के लिए शिशु के साथ माँ के पोषण पर भी ध्यान दिया जाना चाहिए। यही वजह है की अब तक की ज्यादातर कोशिशें कुपोषण को सिरे से खत्म करने में नाकाम रही हैं।

 

भारत सरकार की पोषण योजना ऐसी कोशिश है जो पहले कभी नहीं की गयी। पोषण को आहार और इससे आगे देखना तथा जच्चा-बच्चा दोनों पर ही ध्यान देना, उम्मीद की किरण दिखाता है।