एकपद राजकपोतासन – योग निचले शरीर से जुड़ी तमाम परेशानियों को दूर करने के लिए

2243
The-Rajakapotasana
image credit: StyleCraze

एकपाद राजकपोतासन (one legged king pigeon pose) थोड़ा मुश्किल पर बहुत प्रभावी आसन है जिसमें पीछे की ओर झुकने के साथ छाती उठने से योगी एक राजकपोत अर्थात कबूतर की भांति खूबसूरत मुद्रा में आ जाता है। इस आसन को आप योगाभ्यास के थोड़े अनुभव के बाद कर सकते हैं तथा निरंतर अभ्यास से उच्च स्तर के योगियों के लिए इसी का एक रूप राजकपोतासन आसानी से कर सकते हैं।

 

एकपाद राजकपोतासन श्रृंखला के चार आसनों में से एक है। इस श्रृंखला में एकपाद राजकपोतासन का एक रूपांतर, अर्ध वीरासन और हनुमानासन शामिल है जो बढ़ती कठिनाई के अनुसार जमे हैं।

 

यह एक अत्यंत लाभकारी आसन है जिसके अभ्यास से आपका पोस्चर सुधरेगा। इसके अलावा एकपाद राजकपोतासन के बहुत से लाभ हैं-

 

  • मूत्राशय से जुडी समस्याओं के निराकरण में विशेष लाभ देता है।
  • जांघ, पेडुभाग, पेट, छाती, कंधों और गर्दन की स्ट्रेचिंग कर तनाव खत्म करता है।
  • अंदरूनी अंगों की ओर रक्तप्रवाह बढ़ता है जिससे ये बेहतर ढंग से काम करते हैं।
  • कंधों और छाती को खोले।
  • मन एकाग्रचित होता है।

 

तो आइये जानें, एकपाद राजकपोतासन का अभ्यास कैसे किया जाता है-

 

  • घुटने और हथेली के बल आ जाएं। आपके घुटने एड़ी के ठीक नीचे तथा कलाई कंधे के नीचे होने चाहिए तथा पीठ टेबल की तरह सीधी होनी चाहिए।
  • अपने दाएं घुटने को थोड़ा उठाते हुए दाई कलाई के पास ले आएं। दायां पैर इस तरह मोड़ें की दायां पंजा बाएं घुटने के करीब हो।
  • अब धीरे से बाएं पैर को पीछे खिसकाएं, घुटना सीधा होने लगेगा और जांघ का निचला हिस्सा ज़मीन पर टिक जाएगा।
  • इसके बाद अपने दाएं कूल्हे को ज़मीन की ओर लेकर जाएं। दाई एड़ी बाई जांघ के सामने होगी।
  • इस अवस्था में अपनी सहजता के अनुसार थोड़ा बदलाव लाएं।
  • सांस छोड़ते हुए अपने शरीर के ऊपरी भाग को अंदरूनी दाई जांघ पर टिका दें। इस अवस्था में कुछ गहरी साँसें लें।
  • अब अपने हाथ आगे बढ़ाएं। इस अवस्था में अपना वज़न संतुलित करने की कोशिश करें।
  • अब अपना ऊपरी शरीर पीछे की ओर मोड़ने की कोशिश करें। पहले पेट, फिर छाती और फिर गर्दन को पीछे मोड़ें। हाथोंको भी पीछे ले जाएं।
  • अगर आप एकपाद राजकपोतासन के नए अभ्यार्थी हैं तो इसी अवस्था में रुकें। कुछ दिनों तक इसका अभ्यास करने के बाद आगे बढ़ें।
  • सहज हो जाने पर बाएं घुटने को उठाने तथा मोड़नेका प्रयत्न करें। हाथों से पंजे को पकड़ने की कोशिश करें।
  • कुछ देर इस अवस्था में रुकने के बाद हाथ समाने लाएं और दुबारा हथेली और घुटनों के बल पर आ जाएं।
  • दूसरी तरफ के लिए भी यह क्रिया दोहराएं।

 

एकपाद राजकपोतासन को और भी आसानी से करने के लिए आप इन आसनों का भी अभ्यास कर सकते हैं: बद्ध कोणासन, भुजंगासन, गोमुखासन, सेतु बंध, सुप्त वीरासन, वीरासन, वक्रासन आदि।

 

ध्यान रखें, पैर,घुटना, टखना, जांघ या रीढ़ में चोट होने पर इस आसन का अभ्यास बिल्कुल न करें।