जानिए आयुर्वेद द्वारा सुझाया गया रोगों से लड़ने का तरीका

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तापमान जैसे जैसे कम होता जा रहा है, वैसे ही आपको भी अपनी रोग प्रतिरोधक बढ़ाने की कोशिश शुरू कर देनी चाहिए। आयुर्वेद की माने तो सर्दी का मतलब कफ और सर्दी होना ज़रूरी नहीं है। आपकी कुछ कोशिशें आपके शरीर को हर मौसम के असर से बचा सकती है।

आयुर्वेद के ग्रंथ रोग प्रतिरोधक क्षमता को इस तरह समझाते हैं- शरीर ज़मीन है तथा संक्रमण एक बीज; शरीर में मौजूद अम एवं अन्य विषेले तत्व इस रोग रूपी बीज को पोषण देकर पेड़ बना देते हैं। अगर आप इन बीजों को पोषित नहीं करना चाहते तो आपको शरीर से अम (हानिकारक) तत्व खत्म कर ओजस (ताकत और शक्ति देने वाले) तत्वों को बढ़ाना चाहिए।

 

रोग के बीज को खत्म कर ओजस बढ़ाने के लिए आपको इन नियमों का पालन करना चाहिए-

 

आसानी से पचने वाले आहार चुनें 

ताज़े फल, सब्जी, मोटा अनाज, दाल और दुग्ध पदार्थ आपके लिए श्रेष्ठ हैं। ये जितने ताज़ा होंगे तथा प्रोसेसिंग से मुक्त होंगे, आपके लिए उतने ही लाभप्रद होंगे।

ये सभी आहार प्राणवायु से भरपूर होते हैं तथा आपके शरीर की कोशिकाओं में भी प्राण वायु का संचार करते हैं। अगर आहार बासी हो जाए, लम्बे समय तक डिब्बों में रखा रहे, ठंडा किया जाए या उत्पादन में प्रोसेसिंग की जाए तो इस दौरान कई खतरनाक तत्व आहार का हिस्सा बन जाते हैं तथा कोशिकाओं को लाभ पाने से रोक देते हैं। इतना ही नहीं, ये ओजस कम कर अम बढ़ाने का काम करते हैं।

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रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने वाले मसालों का उपयोग करें 

अपने आहर को इस तरह पकाएं की इसकी प्राणशक्ति व् पोषण की प्रकृति में बदलाव न आए। उदाहरण के लिए आप अगर सब्जी, अनाज और दालों में सौम्य मसालों का उपयोग करेंगे तो यह शरीर में ओजस की प्रकृति बढ़ाएगा। साथ ही मसाले स्वाद बढाते हैं तथा पाचन क्रिया को सुचारू बनाते हैं जिससे शरीर को पूरा पोषण मिल पाता है।

कई महत्वपूर्ण मसाले शरीर की रोगों से लड़ने की क्षमता बढाते हैं। हल्दी अपने इस गुण के लिए जानी जाती है; हल्दी का उपयोग करने से शरीर की अंदर से सफाई होती है, प्राणवायु बढती है तथा अम खत्म होता है। ऐसे ही काली मिर्च शरीर की वाहिकाओं को साफ़ कर ओजस के प्रवाह में मदद करता है।

 

रोग प्रतिरोधक क्षमता बढाने वाले आहार खाएं 

सेब में भरपूर एंटीऑक्सीडेंट और फाइबर होता है जिससे पेट की सफाई होती है तथा रोग प्रतिरोधक क्षमता बढती है। इसी तरह सभी मीठे और रसदार फलों के सेवन से आपका शरीर रोगों से बचता है और ओजस का निर्माण कर पाता है। अगर फल पेड़ पर ही पका है तो इसे पचाना तथा पोषण पाना और भी आसान हो जाता है। अनार का रस, चटनी आदि का उपयोग आपको बिना पित्त दोष को बढाए ये सभी लाभ देता है इसलिए श्रेष्ठ माना जाता है। खाने के बाद पपीता खाने से भी आपका पाचन सही रहता है तथा रोगप्रतिरोधक क्षमता बढती है। सरसों की साग, पालक, केल आदि हरी पत्तेदार सब्जियां जब सही मसालों के साथ बनाई जाती है तो शरीर को बेहतरीन शक्ति और रोग प्रतिरोधक क्षमता दे सकती हैं। इनसे आपको कैल्शियम, आयरन व् अन्य पोषक तत्व मिलते हैं। गोभी के विभिन्न रूप भी आपको अदभुत स्वास्थ्य लाभ पा सकते हैं।

मोटा अनाज में किनोआ, अमरंथ और जवार फाइबर से भरपूर होने की वजह से आपको स्वच्छ तन्त्र देते हैं। अंत में दूध और घी को ओजस बढ़ाने वाला माना जाता है। घी जहाँ आपको बेहतर पाचन क्रिया भी देता है वहीं दूध को अगर भोजन के कुछ घंटे बाद लिया जाए तो आप शक्तिवान बनते हैं।

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खाना पकाएं लेकिन बहुत ज्यादा नहीं 

खाने को पकाने से यह यह सुपाच्य हो जाता है पर अगर इसे बहुत ज्यादा पका दिया जाए तो इसके लाभ कम हो जाते हैं। खाने को पकाते हुए इस बात का ध्यान रखें- सामग्रियां सौम्य और चबाने में आसन हो जानी चाहिए लेकिन भुरभुरी नहीं होनी चाहिए।

 

सही समय पर खाएं 

जब सूर्य अपने चरम पर हो तो पाचन आसान होता है। यही वजह है की दिन का सबसे भारी खाना आपको दोपहर में ही खाना चाहिए। नाश्ता और रात का खाना हल्का करने से इसे पचाना आसान होता है। इस तरह सही समय पर सही आहार लेना आपकी रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ा सकता है।

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