बाजू, कलाई, कंधे और पेट की मांसपेशियों को मजबूत करने के लिए कीजिए तुलासना योग

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tolasana yoga pose
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तुला(तराज़ू) की भांति शरीर को दोनों हाथों पर संतुलित करना ही तुलासन है। यह आसन थोड़ा मुश्किल ज़रूर है लेकिन आपके पेट की मांसपेशियों के लिए इससे बेहतर कोई आसन नहीं। इसका अभ्यास कर आप अपने अंदर बसे संतुलन और बल को जान पाएंगे तथा कई मुश्किल क्रियाओं को आसानी से कर पाएंगे।

 

तो आइये, इस अतुल्य आसन की विधि जानें-

 

  1. पदमासन में आएं। अगर आप पूर्ण पद्मासन नहीं कर सकते तो अर्ध पद्मासन में भी तुलासन के एक रूपांतर का अभ्यास कर सकते हैं। अपने दोनों हाथों की हथेलियों को कूल्हों के पास ज़मीन पर रख दें।
  2. गहरी सांस लें। अब सांस छोड़ते हुए अपने दोनों हाथों से ज़मीन पर दबाव बनाएं। पेट की मांसपेशियों को सिकोड़ें तथा अपने पैर और कूल्हों को ज़मीन से उठा लें। अर्ध पद्मासन में अभ्यास कर रहे हैं तो भी यही करें; अब आपके कुल्हे हवा में होंगे पर पैर नहीं।
  3. इसी मुद्रा में 15-20 सेकंड या अपनी क्षमता के अनुसार रुके रहें। फिर अपने पैर और कूल्हों को सांस छोड़ते हुए ज़मीन पर ले आएं। अब पद्मासन में अपने पैरों की स्थिति बदलें या अर्ध पद्मासन में दुसरे पैर को जांघ पर रखकर इन्हीं चरणों को दोहराएं।

 

अगर आप कलाई या कंधे की कोई भी समस्या हो तो इस आसन का अभ्यास न करें। इसके अलावा टखनों, घुटनों या जाँघों की कोई समस्या होने पर भी तुलासन का अभ्यास बेहद सावधानी से करना चाहिए।

तुलासन के पहले पद्मासन का पूरी तरह अभ्यास करना आपको कई सम्भावित चोटों से बचा सकता है। अगर आपके लिए तुलासन में पैरों को हवा में उठाना मुश्किल हो रहा है तो दोनों हाथों के नीचे एक-एक मोटी पट्टी या लकड़ी का खंड रख लें और फिर कोशिश करें।

 

तुलासन के नियमित अभ्यास से आप अनगिनत फायदे पा सकते हैं, जिनमें में कुछ इस प्रकार है-

  • तुलासन से आपकी बाजू, कलाई, कंधे और पेट को ताकत मिलती है।
  • इससे आपकी पाचन क्रिया बेहतर होने लगती है।
  • कहा जाता है की यह आपके शरीर के हर रोग और रोग को खत्म कर सकता है। पेट की मांसपेशियों को मजबूती देने की वजह से यह रीढ़ को मिलने वाला सहारा बढ़ाता है जिससे कमर दर्द की समस्या नहीं रहती।
  • यह आपके शरीर और मन का संतुलन बेहतर करता है जिसका असर आप अपनी दिनचर्या में आसानी से महसूस कर सकते हैं।
  • इसके अभ्यास से आपके पेट की चर्बी खत्म होती है और पूरा शरीर सुगठित हो जाता है।