शरीर की मजबूती के साथ साथ एकाग्रता बढ़ाता है – वशिष्ठासन योग

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वशिष्ठ मतलब सबसे अधिक प्रतिष्ठित, सप्त ऋषियों में ऋषि वशिष्ठ को सर्वश्रेष्ठ माना गया है। वे ऋग्वेद के मुख्य लेखक थे। ऋषि वशिष्ठ के पास कामधेनु नामक एक गाय तथा उसका बच्चा नंदिनी था, यह दैवीय गाय उन्हें कुछ भी दे सकती थी। और इस प्रकार ऋषि वशिष्ठ धनी हो गए इसी कारण वशिष्ठ का अर्थ धनी भी होता है।

आइये देखते है वशिष्ठ आसन करने की विधी-

1- सर्वप्रथम दण्डासन में की स्थिति में आ जाएँ। अब धीरे धीरे अपना वजन दाहिने पैर तथा दाहिने हाथ पर डालें।

2- अब बाएं पैर को दाहिने पैर पर तथा बाएं हाथ को कूल्हे पर रखें।

3- दाहिना हाथ कंधे के लगभग सामने होना चाहिए, नीचे नही होना चाहिए। अब हथेली को जमीन पर जोर से दबाएँ, आपकी बांह मुड़ी हुई नही होनी चाहिए।

4- अब जैसे जैसे आप सांस को अंदर खींचें, अपने बाएं हाथ को ऊपर की ओर फैलाएं। आपका हाथ जमीन से 90 डिग्री का कोण बनाते हुए होना चाहिए। आपकी उंगलिया छत की ओर होनी चाहिए।

5- अब अपनी गर्दन को ऊपर की तरफ घुमाएं। और उँगलियों के पोरों की तरफ देखते हुए कुछ साँसे लें।

6- अब सांस को बाहर की तरफ छोड़ते हुए, हाथ को नीचे की तरफ लायें और कूल्हे पर रखें।

7- धीरे धीरे दण्डासन की स्थिति में आयें और कुछ सेकंड आराम करें।

8- अब दूसरी तरफ के लिए यही प्रक्रिया दोहरायें।

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वशिस्ठ आसन के लाभ-
• यह आसन भुजाओं, कलाइयों तथा पैरों को मजबूत करता है।
• यह पेट की मांसपेशियों को भी मजबूत करता है।
• शरीर के संतुलन तथा एकाग्रता में इजाफा करता है।
• यह रीढ़ की हड्डी को और लचीला बनाता है।

चेतावनी- यदि आपको कलाई, कंधे या कोहनी में चोट है या दर्द है तो इस आसन को न करें।