कैसे पाएं राहत नींद से जुड़े विकारों से

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snoring
image credits: http://wakeuptothesunriselight.com

कोई भी अवस्था जो आपकी नींद में बाधा उत्पन्न करती है तथा जिसकी वजह से आपकी नींद पूरी नहीं हो पाती, स्लीप डिसऑर्डर कही जाती है। ये कई रूप से आप के ऊपर प्रभाव डाल सकती है पर इसके तीन मुख्य रूप हैं।(sleep disorders treatment and care)

आइये, नींद से जुड़े इन तीन विकारों को जानें-

 

स्लीप एपनिया 

ये सबसे आम विकार है जिसे व्यक्ति अक्सर खर्राटे का नाम देकर नज़रंदाज़ कर देता है। इस समस्या में रोगी की साँसें नियमित नहीं रहती तथा सोते समय अक्सर रुकने लगती है।

दरअसल सोते समय गले की मांसपेशियां भी आराम करती हैं। एपनिया के मरीज़ की यह मांसपेशियां इतनी शिथिल हो जाती है की साँस की नली में अवरोध उत्पन्न कर देती है। इससे कुछ समय के लिए सांस रुक जाती है और रोगी जाग जाता है। अगली सुबह रोगी को याद भी रहता की रात में ऐसा कुछ हुआ था।

 

स्लीप एपनिया के लक्षण इस प्रकार है-

  • बहुत ज्यादा खर्राटे आना
  • दिनभर थका महसूस करना
  • सुबह उठने पर सिरदर्द महसूस होना
  • मांसपेशियों में सामंजस्य कम होना
  • मनोदशा में बदलाव आना
  • डिप्रेशन होना

 

ये समस्या उन लोगों में आम है जो दिन में बैठे-बैठे ही सो जाते हैं। स्लीप एपनिया सिंड्रोम तब माना जाता है जब एक घंटे में 7 बार से ज्यादा एपनिया देखा जाता है। यह सिंड्रोम आपको हाइपरटेंशन, ह्रदयरोग, स्ट्रोक्स आदि का शिकार बना सकता है।

 

उपचार- सोने की अपनी मुद्रा में बदलाव लाकर आप इस समस्या से थोड़ी राहत पा सकते हैं। इसके अलावा आप थाइरोइड की जांच भी करवा सकते हैं। अब BIPAP नामक मशीन के द्वारा सोने के पहले रोगी के नाक में हवा को पुरे दबाव से डाला जाता है जिससे सोते समय श्वास नली अवरोधित होने की आशंका कम हो जाती है। ज़ाहिर है, ऐसा ही प्रभाव आप प्राणायाम के द्वारा बना सकते हैं।

 

नार्कोलेप्सी 

इस समस्या में आपकी नींद की ज़रूरत सामान्य से ज़्यादा हो जाती है। इसके रोगी को दिन में कभी भी अनिवार्य नींद आ सकती है, चाहे वो बहुत ज़रूरी काम कर रहा हो। इसकी वजह से आपकी नींद का समय भी अनियमित होता जाता है तथा अवधि घट जाती है।

ये ज्यादातर मामलो में एक अनुवांशिक विकार है जिसे उपचार की ज़रूरत होती है। इसके अलावा गर्भधारण, बुखार, तनाव आदि में भी ये समस्या उत्पन्न हो सकती है।

 

आपको नाक्रोलेप्सी हो सकता है अगर आपको दिनभर में 3-4 बार नींद के झोके आते हैं तथा आपको कोई अतिरिक्त खर्राटे या मोटापा नहीं आ रहा है और आप नींद में लकवाग्रस्त महसूस कर रहे हैं।

 

इस अवस्था का कोई उपचार आधुनिक चिकित्सा विज्ञान में नहीं है। इसमें राहत पाने के लिए चिकित्सक आपकी दिनचर्या में कुछ बदलाव लाने की सलाह देते हैं। इसके अलावा आप रात में कुछ हल्का खाने तथा खाने के बाद कुछ देर की नींद लेना भी आजमा सकते हैं।

 

इनसोम्निया 

इसे आप अनिद्रा के नाम से भी जानते हैं। इसके रोगी को सोने में बहुत समय लगता है तथा सुबह भी वह समय से जल्दी उठ जाता है। इस तरह उसकी नींद 4 घंटे या इससे कम की होती है तथा शरीर को पूरी तरह आराम नहीं मिल पाता है।

इस रोग की वजहें हैं जिनमें मुख्य है –

 

  • मनःस्थिति के रोग जैसे अवसाद, घबराहट, पागलपन तथा चिडचिडापन।
  • शरीर में तकलीफ या असहजता के कारण अनिद्रा
  • नींद से जुड़े अन्य रोग
  • कुछ खास तरह की दवाएं

 

अनिद्रा के उपचार के लिए आपको अपने चिकित्सक से मिलने की ज़रूरत है। उन्हें वो सारी वजहें बताएं जो आपकी अनिद्रा के कारण हो सकते हैं- जीवन में आई मुश्किल परिस्थितियां, काम का दबाव, दवाएं या दर्द। इसके अनुरूप उनके सुझाए तरीकों का पालन शुरू करें। इसके अलावा आपको अपने जीवन में कार्डियो वर्कआउट  तथा प्राणायाम को भी जगह देना चाहिए।

 

नींद से जुडी समस्या हो तो क्या करें?

ज्यादातर देशों में स्लीप क्लिनिक होते हैं जहाँ जाकर आप अपनी नींद से जुडी समस्याओं का हल पा सकते हैं। भारत में आज भी स्लीप क्लिनिक्स की संख्या बहुत ज्यादा नहीं है।

अगर आप किसी बड़े शहर में रहते हैं तो हो सकता है नींद के विशेषज्ञ या स्लीप क्लिनिक आपके क्षेत्र में मौजूद हों। इनके पास जाकर आप चेकअप करा सकते हैं। अगर नहीं, तो आप न्यूरोलॉजिस्ट की भी मदद ले सकते हैं।