सर्दियों में शरीरदर्द से निजात पाएं इन योगासनों की मदद से

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मौसम ठंडा होने पर अक्सर हमारे शरीर में अकडन और दर्द होने लगता है। (yoga to stay fit and slim in winters) आर्थराइटिस के रोगी या वातदोष होने पर यह पीड़ा और भी बढ़ जाती है। यह हमारी दिनचर्या को प्रभावित कर काम की गुणवत्ता बहुत कम देते हैं। कई लोग इस दर्द से निजात पाने के लिए पीडानाशक दवाएं लेने लगते हैं जिसके शरीर पर गंभीर दुष्प्रभाव होते हैं।

 

अगर आपकी सर्दियाँ भी इसी तरह तकलीफ और दवाओं में निकलती है तो आपको कुछ ज़रूरी बदलावों की ज़रूरत है। सही आहार और दिनचर्या के साथ कुछ योगासनों का अभ्यास इस साल आपकी सर्दियों की कहानी बदल सकते हैं।

 

तो आइये जानते हैं, किन आसनों का अभ्यास इस मौसम में आपके लिए लाभदायक साबित होगा-

 

वीरभद्र आसन-

वीरभद्र आसन सबसे सुंदर आसनों में से एक है जो आपके योगाभ्यास और भंगिमा में सजीलापन ज़रूर जोड़ेगा। इसका अभ्यास इस तरह करें-

 

सीधे खड़े होकर अपने दोनों पैरों के बीच 3-4 फीट की दुरी बना लें। अपने दाएँ पैर को 90 डिग्री के कोण पर बाहर की ओर घुमाएँ तथा बाएं पैर को 15 डिग्री के कोण पर अंदर की ओर घुमाएं। अपने दोनों हाथों को हवा में कंधों की ऊंचाई तक उठाएं। आपकी हथेलियाँ ऊपर की ओर खुली होनी चाहिए।  सांस छोड़ते हुए अपने दाएँ घुटने को मोड़ें। आपका घुटना और टखना सीधी रेखा में होने चाहिए। अब अपनी गर्दन को दाई ओर घुमा लें। अपना वजन दाएँ पंजे पर डालते हुए दोनों हाथ और भी फैला लें। इस अवस्था में मजबूती के साथ किसी वीर की भांति खड़े रहें। इस दौरान साँसों पर ध्यान रखें तथा साँसों की गति सामान्य रखें। अब सांस छोड़ते हुए घुटना सीधा करें तथा सामने की ओर आ जाएँ। धीमे से अपने हाथ भी नीचे कर लें। दूसरी ओर के लिए भी इस आसन को दोहराएँ।

 

यह आसन आपके निचले शरीर को दुरुस्त रखेगा तथा मन शांत रखेगा। यह घुटनों की समस्या तथा कंधों के अकड़ने की समस्या में विशेषकर लाभदायक है।

 

धनुरासन-

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किसी धनु की तरह ही शरीर को पूरी तरह खीचने वाला यह आसन आपको तुरंत अकडन से राहत देगा। इसका अभ्यास इस तरह करें-

 

एक दरी बिछाकर इसपर पेट के बल लेट जाएँ। अब दोनों घुटनों को पीछे की ओर मोड़ें तथा हाथों को पीछे ले जाकर टखनो को पकड़ने की कोशिश करें। हाथों से जितना हो सके पैरों को खीचें। सामान्य साँसें लेने की कोशिश करें तथा इस अवस्था में 10-60 सेकंड तक रुकें।

 

यह आसन कंधों को खोलकर इन्हें दर्द से मुक्त करता है। साथ ही यह कमर को लचीला बनाता है तथा तनाव और आलस को दूर भगाता है।

 

सेतु-बंधासन-

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सेतु या पुल की तरह दिखने वाला यह आसन कई रोगियों के लिए राहत का आसन सिद्ध हो सकता है।

 

एक दरी पर पीठ के बल सीधा लेट जाएँ। दोनों हथेलियाँ आपके कूल्हों के पास रखी रहेंगी। अब घुटनों को मोड़कर पंजों को ज़मीन पर रखें। पंजों को धीरे-धीरे कूल्हों के करीब लेकर आएं ताकि आपके शरीर का निचला हिस्सा ज़मीन से ऊपर उठ जाए। अब गहरी सांस लेते हुए कंधों के नीचे के हिस्से को ज़मीन से ऊपर उठाएं। इस तरह आपका शरीर कंधों और पंजों के बीच एक सेतु बना लेगा। इसी अवस्था में सामान्य गति से साँसें लेते हुए कुछ सेकंड रुकें। फिर सांस छोड़ते हुए शरीर नीचे ज़मीन पर टिका लें।

 

सेतु-बंधासन से घुटनों की मांसपेशियां मजबूत होती हैं तथा मन भी तनाव मुक्त हो जाता है। ऑस्टियोपोरोसिस के उपचार और बचाव में भी यह अहम् भूमिका निभा सकता है।

 

त्रिकोणासन-

अन्य आसनों से अलग इस आसन में आपकी आँखें खुली होती हैं ताकि आप शरीर का संतुलन बनाए रखें।

 

सीधे खड़े हो जाएँ। दोनों पैरों के बीच 3-4 फीट की दुरी बना लें। अब अपने हाथों को कन्धों की ऊंचाई तक हवा में उठा लें। हथेलियाँ ज़मीन की ओर होनी चाहिए। अब अपने दाएँ पैर को बाहर की ओर 90 डिग्री तक घुमाएँ तथा बाएं पैर को थोडा अंदर की ओर घुमाएँ। आपकी एडियाँ अब भी सीध में होनी चाहिए। गहरी सांस लें तथा दाएँ पैर को दाई हथेली से छूने का प्रयास करते हुए जितना हो सके झुकें। दूसरी हथेली विपरीत दिशा में हवा में होगी। इस हथेली की ओर देखने का प्रयास करते हुए संतुलन बनाएँ रखें। कुछ सेकंड इस अवस्था में रहने के बाद सांस छोड़ते हुए सीधे खड़े हो जाएँ। बाई ओर के लिए भी इस आसन को दोहराएँ।

 

पैर, टखने, घुटने और पीठ को लाभ देने वाला यह आसन आपके शरीर में उर्जा और रक्तप्रवाह को तुरंत बढ़ाने का काम करेगा।